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डूबते सूरज के नज़ारे से,00:48:28
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भर आएँ आँखें, याद करके00:48:32
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वो लमहें साथ बीते अपनों के;00:48:35
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ये तोहफे सारे हैं तुझसे!00:48:39
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खूब हैं काम हाथों के तेरे,00:48:42
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जब सोचूँ इन पे ईमान बढ़े,00:48:46
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तारीफ निकले मेरे होंठों से,00:48:49
00:48:49
दिल खोलके दे तू सब को भलाई से!00:48:55
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दर्या-दिल है तू पिता,00:48:59
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मेरा दिल जीता तूने!00:49:03
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तू खोले हाथ जिस तरह,00:49:06
00:49:06
शुक्र मानूँ मैं दिल से!00:49:10
00:49:10
अब दर्या-दिल बनूँ मैं तेरे जैसे ही,00:49:13
00:49:13
दूसरों को प्यार से दूँ, खुद-गर्ज़ी से नहीं!00:49:17
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दर्या-दिल है तू कितना!00:49:21
00:49:21
बनूँ मैं वैसे ही!00:49:25
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बनूँ मैं वैसे ही!00:49:34
00:49:37
तू रोज़ दे बुद्धि हल्की बारिश-सी,00:49:41
00:49:41
महकाए जो बंजर ज़मीं मन की।00:49:44
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बूँदें सच्चा-ई की ताज़गी दें00:49:48
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जो गहराई तक मन सींचें।00:49:51
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दर्या-दिली तेरी उभारे यूँ,00:49:55
00:49:55
देने खुशखबरी हर जगह जाऊँ।00:49:58
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तू है भला वो भी जानें,00:50:01
00:50:01
शुक्रगुज़ार बनके वो तेरे पास आएँ, क्योंकि00:50:08
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दर्या-दिल है तू पिता,00:50:12
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मेरा दिल जीता तूने!00:50:15
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तू खोले हाथ जिस तरह,00:50:18
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शुक्र मानूँ मैं दिल से!00:50:22
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अब दर्या-दिल बनूँ मैं तेरे जैसे ही,00:50:25
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दूसरों को प्यार से दूँ, खुद-गर्ज़ी से नहीं!00:50:29
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दर्या-दिल है तू कितना!00:50:33
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बनूँ मैं वैसे ही!00:50:38
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बनूँ मैं वैसे ही!00:50:47
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बनूँ मैं वैसे ही!00:50:53
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बनूँ मैं वैसे ही!00:51:01
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दर्या-दिल है तू पिता,00:51:08
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मेरा दिल जीता तूने!00:51:11
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तू खोले हाथ जिस तरह,00:51:15
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शुक्र मानूँ मैं दिल से!00:51:18
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अब दर्या-दिल बनूँ मैं तेरे जैसे ही,00:51:22
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दूसरों को प्यार से दूँ, खुद-गर्ज़ी से नहीं!00:51:26
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दर्या-दिल है तू कितना!00:51:30
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बनूँ मैं वैसे ही!00:51:35
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बनूँ मैं वैसे ही!00:51:43
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बनूँ मैं वैसे ही!00:51:49
JW ব্ৰডকাষ্টিং—এপ্ৰিল ২০২৬
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JW ব্ৰডকাষ্টিং—এপ্ৰিল ২০২৬
डूबते सूरज के नज़ारे से,
भर आएँ आँखें, याद करके
वो लमहें साथ बीते अपनों के;
ये तोहफे सारे हैं तुझसे!
खूब हैं काम हाथों के तेरे,
जब सोचूँ इन पे ईमान बढ़े,
तारीफ निकले मेरे होंठों से,
दिल खोलके दे तू सब को भलाई से!
दर्या-दिल है तू पिता,
मेरा दिल जीता तूने!
तू खोले हाथ जिस तरह,
शुक्र मानूँ मैं दिल से!
अब दर्या-दिल बनूँ मैं तेरे जैसे ही,
दूसरों को प्यार से दूँ, खुद-गर्ज़ी से नहीं!
दर्या-दिल है तू कितना!
बनूँ मैं वैसे ही!
बनूँ मैं वैसे ही!
तू रोज़ दे बुद्धि हल्की बारिश-सी,
महकाए जो बंजर ज़मीं मन की।
बूँदें सच्चा-ई की ताज़गी दें
जो गहराई तक मन सींचें।
दर्या-दिली तेरी उभारे यूँ,
देने खुशखबरी हर जगह जाऊँ।
तू है भला वो भी जानें,
शुक्रगुज़ार बनके वो तेरे पास आएँ, क्योंकि
दर्या-दिल है तू पिता,
मेरा दिल जीता तूने!
तू खोले हाथ जिस तरह,
शुक्र मानूँ मैं दिल से!
अब दर्या-दिल बनूँ मैं तेरे जैसे ही,
दूसरों को प्यार से दूँ, खुद-गर्ज़ी से नहीं!
दर्या-दिल है तू कितना!
बनूँ मैं वैसे ही!
बनूँ मैं वैसे ही!
बनूँ मैं वैसे ही!
बनूँ मैं वैसे ही!
दर्या-दिल है तू पिता,
मेरा दिल जीता तूने!
तू खोले हाथ जिस तरह,
शुक्र मानूँ मैं दिल से!
अब दर्या-दिल बनूँ मैं तेरे जैसे ही,
दूसरों को प्यार से दूँ, खुद-गर्ज़ी से नहीं!
दर्या-दिल है तू कितना!
बनूँ मैं वैसे ही!
बनूँ मैं वैसे ही!
बनूँ मैं वैसे ही!
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