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लफ्ज़ हों मरहम; या वो दें ज़खम00:48:36
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सिल दे रिश्तों को, या उलझाएँ मन।00:48:42
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आएँ सफर में, आँधियाँ हज़ार;00:48:48
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जब लफ्ज़ प्यारे तो मिल के कर लें पार।00:48:54
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देखो, क्या खूब कितनी प्यारी, 00:49:00
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सही वक्त पर बोली; वो बात एक नज़्म सी।00:49:07
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मन को मीठी, लगे शहद जैसी!00:49:13
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नरमी से जवाब पिघला दे पत्थर भी;00:49:19
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तो आओ जीतें दिल हम बोली से अपनी।00:49:27
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सही वक्त पर कही बात क्या खूब!00:49:33
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फिज़ा में है जग की फितरत फैली;00:49:51
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महफूज़ रहे दिल जब, हम अपनाएँ सोच याह की;00:49:57
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झलकेगा फिर प्यार, जो दिल में बसा00:50:03
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हमारे लफ्ज़ छू लें दिल उनका!00:50:09
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देखो, क्या खूब कितनी प्यारी, 00:50:16
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सही वक्त पर बोली; वो बात एक नज़्म सी।00:50:22
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मन को मीठी, लगे शहद जैसी!00:50:28
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नरमी से जवाब पिघला दे पत्थर भी;00:50:34
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तो आओ जीतें दिल हम बोली से अपनी।00:50:41
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सही वक्त पर कही बात क्या खूब!00:50:47
00:51:28
देखो, क्या खूब कितनी प्यारी,00:51:34
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सही वक्त पर बोली; वो बात एक नज़्म सी।00:51:39
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मन को मीठी, लगे शहद जैसी!00:51:46
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नरमी से जवाब पिघला दे पत्थर भी;00:51:52
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तो आओ जीतें दिल हम बोली से अपनी।00:51:58
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सही वक्त पर कही बात क्या खूब!00:52:06
JW ब्रॉडकास्टिंग—मई 2026
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JW ब्रॉडकास्टिंग—मई 2026
लफ्ज़ हों मरहम; या वो दें ज़खम
सिल दे रिश्तों को, या उलझाएँ मन।
आएँ सफर में, आँधियाँ हज़ार;
जब लफ्ज़ प्यारे तो मिल के कर लें पार।
देखो, क्या खूब कितनी प्यारी,
सही वक्त पर बोली; वो बात एक नज़्म सी।
मन को मीठी, लगे शहद जैसी!
नरमी से जवाब पिघला दे पत्थर भी;
तो आओ जीतें दिल हम बोली से अपनी।
सही वक्त पर कही बात क्या खूब!
फिज़ा में है जग की फितरत फैली;
महफूज़ रहे दिल जब, हम अपनाएँ सोच याह की;
झलकेगा फिर प्यार, जो दिल में बसा
हमारे लफ्ज़ छू लें दिल उनका!
देखो, क्या खूब कितनी प्यारी,
सही वक्त पर बोली; वो बात एक नज़्म सी।
मन को मीठी, लगे शहद जैसी!
नरमी से जवाब पिघला दे पत्थर भी;
तो आओ जीतें दिल हम बोली से अपनी।
सही वक्त पर कही बात क्या खूब!
देखो, क्या खूब कितनी प्यारी,
सही वक्त पर बोली; वो बात एक नज़्म सी।
मन को मीठी, लगे शहद जैसी!
नरमी से जवाब पिघला दे पत्थर भी;
तो आओ जीतें दिल हम बोली से अपनी।
सही वक्त पर कही बात क्या खूब!
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