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JW ब्रॉडकास्टिंग—मई 2026

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लफ्ज़ हों मरहम; या वो दें ज़खम
सिल दे रिश्‍तों को, या उलझाएँ मन।
आएँ सफर में, आँधियाँ हज़ार;
जब लफ्ज़ प्यारे तो मिल के कर लें पार।
देखो, क्या खूब कितनी प्यारी,
सही वक्‍त पर बोली; वो बात एक नज़्म सी।
मन को मीठी, लगे शहद जैसी!
नरमी से जवाब पिघला दे पत्थर भी;
तो आओ जीतें दिल हम बोली से अपनी।
सही वक्‍त पर कही बात क्या खूब!
फिज़ा में है जग की फितरत फैली;
महफूज़ रहे दिल जब, हम अपनाएँ सोच याह की;
झलकेगा फिर प्यार, जो दिल में बसा
हमारे लफ्ज़ छू लें दिल उनका!
देखो, क्या खूब कितनी प्यारी,
सही वक्‍त पर बोली; वो बात एक नज़्म सी।
मन को मीठी, लगे शहद जैसी!
नरमी से जवाब पिघला दे पत्थर भी;
तो आओ जीतें दिल हम बोली से अपनी।
सही वक्‍त पर कही बात क्या खूब!
देखो, क्या खूब कितनी प्यारी,
सही वक्‍त पर बोली; वो बात एक नज़्म सी।
मन को मीठी, लगे शहद जैसी!
नरमी से जवाब पिघला दे पत्थर भी;
तो आओ जीतें दिल हम बोली से अपनी।
सही वक्‍त पर कही बात क्या खूब!